महाभारत 14.4.25
मेरुं पर्वतमासाद्य हिमवत्पार्श्व उत्तरेकाञ्चनः सुमहान्पादस्तत्र कर्म चकार सः
meruṃ parvatamāsādya himavatpārśva uttarekāñcanaḥ sumahānpādastatra karma cakāra saḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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