महाभारत 14.49.35
बीजधर्मं यथाव्यक्तं तथैव प्रसवात्मकम्बीजधर्मा महानात्मा प्रसवश्चेति नः श्रुतम्
bījadharmaṃ yathāvyaktaṃ tathaiva prasavātmakambījadharmā mahānātmā prasavaśceti naḥ śrutam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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