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महाभारत 14.6.23
तस्या द्वारं समासाद्य न्यसेथाः कुणपं क्वचित्तं दृष्ट्वा यो निवर्तेत स संवर्तो महीपते
tasyā dvāraṃ samāsādya nyasethāḥ kuṇapaṃ kvacittaṃ dṛṣṭvā yo nivarteta sa saṃvarto mahīpate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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