महाभारत 14.71.14
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
इत्युक्तः स तु राजेन्द्र कृष्णद्वैपायनोऽब्रवीत्भीमसेनादवरजः श्रेष्ठः सर्वधनुष्मताम्
ityuktaḥ sa tu rājendra kṛṣṇadvaipāyano'bravītbhīmasenādavarajaḥ śreṣṭhaḥ sarvadhanuṣmatām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें