महाभारत 14.72.2
कृत्वा स पशुबन्धांश्च दीक्षितः पाण्डुनन्दनःधर्मराजो महातेजाः सहर्त्विग्भिर्व्यरोचत
kṛtvā sa paśubandhāṃśca dīkṣitaḥ pāṇḍunandanaḥdharmarājo mahātejāḥ sahartvigbhirvyarocata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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