महाभारत 15.26.2
द्वैपायनः सशिष्यश्च सिद्धाश्चान्ये मनीषिणःशतयूपश्च राजर्षिर्वृद्धः परमधार्मिकः
dvaipāyanaḥ saśiṣyaśca siddhāścānye manīṣiṇaḥśatayūpaśca rājarṣirvṛddhaḥ paramadhārmikaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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