महाभारत 18.1.21
यत्कृते पृथिवी नष्टा सहया सरथद्विपावयं च मन्युना दग्धा वैरं प्रतिचिकीर्षवः
yatkṛte pṛthivī naṣṭā sahayā sarathadvipāvayaṃ ca manyunā dagdhā vairaṃ praticikīrṣavaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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