महाभारत 18.2.54निवेदयामास च तद्धर्मराजचिकीर्षितम्यथोक्तं धर्मपुत्रेण सर्वमेव जनाधिपnivedayāmāsa ca taddharmarājacikīrṣitamyathoktaṃ dharmaputreṇa sarvameva janādhipaइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें