महाभारत 18.3.2
स्वयं विग्रहवान्धर्मो राजानं प्रसमीक्षितुम्तत्राजगाम यत्रासौ कुरुराजो युधिष्ठिरः
svayaṃ vigrahavāndharmo rājānaṃ prasamīkṣitumtatrājagāma yatrāsau kururājo yudhiṣṭhiraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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