महाभारत 3.125.23
अत्र राजा महेष्वासो मान्धातायजत स्वयम्सहदेवश्च कौन्तेय सोमको ददतां वरः
atra rājā maheṣvāso māndhātāyajata svayamsahadevaśca kaunteya somako dadatāṃ varaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें