महाभारत 3.169.32
तत एषां वधार्थाय शक्रोऽस्त्राणि ददौ तवन हि शक्याः सुरैर्हन्तुं य एते निहतास्त्वया
tata eṣāṃ vadhārthāya śakro'strāṇi dadau tavana hi śakyāḥ surairhantuṃ ya ete nihatāstvayā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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