महाभारत 4.29.25
ते यात्वा सहसा तत्र विराटनगरं प्रतिक्षिप्रं गोपान्समासाद्य गृह्णन्तु विपुलं धनम्
te yātvā sahasā tatra virāṭanagaraṃ pratikṣipraṃ gopānsamāsādya gṛhṇantu vipulaṃ dhanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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