महाभारत 5.129.22
सूपस्करेण शुभ्रेण वैयाघ्रेण वरूथिनासैन्यसुग्रीवयुक्तेन प्रत्यदृश्यत दारुकः
sūpaskareṇa śubhreṇa vaiyāghreṇa varūthināsainyasugrīvayuktena pratyadṛśyata dārukaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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