महाभारत 5.80.3
भीमसेनं च संशान्तं दृष्ट्वा परमदुर्मनाःअश्रुपूर्णेक्षणा वाक्यमुवाचेदं मनस्विनी
bhīmasenaṃ ca saṃśāntaṃ dṛṣṭvā paramadurmanāḥaśrupūrṇekṣaṇā vākyamuvācedaṃ manasvinī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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