महाभारत 5.93.47
आहुश्चेमां परिषदं पुत्रास्ते भरतर्षभधर्मज्ञेषु सभासत्सु नेह युक्तमसांप्रतम्
āhuścemāṃ pariṣadaṃ putrāste bharatarṣabhadharmajñeṣu sabhāsatsu neha yuktamasāṃpratam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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