महाभारत 6.22.4
अनीकं दक्षिणं राजन्युयुधानेन पालितम्श्रीमता सात्वताग्र्येण शक्रेणेव धनुष्मता
anīkaṃ dakṣiṇaṃ rājanyuyudhānena pālitamśrīmatā sātvatāgryeṇa śakreṇeva dhanuṣmatā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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