महाभारत 6.28.4
यदा हि नेन्द्रियार्थेषु न कर्मस्वनुषज्जतेसर्वसंकल्पसंन्यासी योगारूढस्तदोच्यते
yadā hi nendriyārtheṣu na karmasvanuṣajjatesarvasaṃkalpasaṃnyāsī yogārūḍhastadocyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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