महाभारत 6.47.27
काशिराजश्च शैब्यश्च शिखण्डी च महारथःधृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्च महायशाः
kāśirājaśca śaibyaśca śikhaṇḍī ca mahārathaḥdhṛṣṭadyumno virāṭaśca sātyakiśca mahāyaśāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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