महाभारत 6.49.25
अथैनं छिन्नधन्वानं शरैः संनतपर्वभिःअवाकिरदमेयात्मा वृष्ट्या मेघ इवाचलम्
athainaṃ chinnadhanvānaṃ śaraiḥ saṃnataparvabhiḥavākiradameyātmā vṛṣṭyā megha ivācalam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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