महाभारत 6.49.27पातयामास समरे सिंहनादं ननाद चततोऽपरेण भल्लेन हस्ताच्चापमथाच्छिनत्pātayāmāsa samare siṃhanādaṃ nanāda catato'pareṇa bhallena hastāccāpamathācchinatइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें