महाभारत 6.67.4
विद्युतं मेघमध्यस्थां भ्राजमानामिवाम्बरेददृशुर्गाण्डिवं योधा रुक्मपृष्ठं महारथे
vidyutaṃ meghamadhyasthāṃ bhrājamānāmivāmbaredadṛśurgāṇḍivaṃ yodhā rukmapṛṣṭhaṃ mahārathe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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