महाभारत 6.82.51एवमेते महाराज तावकाः पाण्डवैः सहपर्यवर्तन्त सहिता निशाकाले परंतपाःevamete mahārāja tāvakāḥ pāṇḍavaiḥ sahaparyavartanta sahitā niśākāle paraṃtapāḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें