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महाभारत 7.51.23
रक्षमाणाश्च तं संख्ये ये मां योत्स्यन्ति केचनअपि द्रोणकृपौ वीरौ छादयिष्यामि ताञ्शरैः
rakṣamāṇāśca taṃ saṃkhye ye māṃ yotsyanti kecanaapi droṇakṛpau vīrau chādayiṣyāmi tāñśaraiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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