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महाभारत 7.66.40
पुत्रशोकाभिसंतप्तं क्रुद्धं मृत्युमिवान्तकम्त्यजन्तं तुमुले प्राणान्संनद्धं चित्रयोधिनम्
putraśokābhisaṃtaptaṃ kruddhaṃ mṛtyumivāntakamtyajantaṃ tumule prāṇānsaṃnaddhaṃ citrayodhinam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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