महाभारत 7.70.39
अजातशत्रुं कौन्तेयं ज्वलन्तमिव पावकम्मद्राणामीश्वरः शल्यो राजा राजानमावृणोत्
ajātaśatruṃ kaunteyaṃ jvalantamiva pāvakammadrāṇāmīśvaraḥ śalyo rājā rājānamāvṛṇot
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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