वाल्मीकि रामायण 1.1.24
स जगाम वनम् वीरः प्रतिज्ञाम् अनुपालयन् ।पितुर् वचन निर्देशात् कैकेय्याः प्रिय कारणात्॥
sa jagāma vanam vīraḥ pratijñām anupālayan |pitur vacana nirdeśāt kaikeyyāḥ priya kāraṇāt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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