वाल्मीकि रामायण 1.1.82
ताम् उवाच ततः रामः परुषम् जन संसदि ।अमृष्यमाणा सा सीता विवेश ज्वलनम् सती॥
tām uvāca tataḥ rāmaḥ paruṣam jana saṃsadi |amṛṣyamāṇā sā sītā viveśa jvalanam satī ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें