वाल्मीकि रामायण 1.21.10
एष विग्रहवान् धर्म एष वीर्यवताम् वरः ।एष विद्य अधिको लोके तपसः च परायणम्॥
eṣa vigrahavān dharma eṣa vīryavatām varaḥ |eṣa vidya adhiko loke tapasaḥ ca parāyaṇam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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