वाल्मीकि रामायण 1.21.9
कृतास्त्रम् अकृतास्त्रम् वा न एवम् शक्ष्यन्ति राक्षसाः ।गुप्तम् कुइशिक पुत्रेण ज्वलनेन अमृतम् यथा॥
kṛtāstram akṛtāstram vā na evam śakṣyanti rākṣasāḥ |guptam kuiśika putreṇa jvalanena amṛtam yathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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