वाल्मीकि रामायण 1.21.8
प्रति श्रुत्य करिष्ये इति उक्तम् वाक्यम् अकुर्वतः ।इष्टापूर्त वधो भूयात् तस्मात् रामम् विसर्जय॥
prati śrutya kariṣye iti uktam vākyam akurvataḥ |iṣṭāpūrta vadho bhūyāt tasmāt rāmam visarjaya ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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