वाल्मीकि रामायण 1.30.14
तौ आपतन्तौ सहसा दृष्ट्वा राजीव लोचनः ।लक्ष्मणम् तौ अभिसंप्रेक्ष्य रामो वचनम् अब्रवीत्॥
tau āpatantau sahasā dṛṣṭvā rājīva locanaḥ |lakṣmaṇam tau abhisaṃprekṣya rāmo vacanam abravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें