वाल्मीकि रामायण 1.39.20
योजनानाम् सहस्राणि षष्टिम् तु रघुनंदन ।बिभिदुर् धरणीम् राम रसा तलम् अनुत्तमम्॥
yojanānām sahasrāṇi ṣaṣṭim tu raghunaṃdana |bibhidur dharaṇīm rāma rasā talam anuttamam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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