वाल्मीकि रामायण 1.39.21
एवम् पर्वत संबाधम् जम्बू द्वीपम् नृपात्मजाः ।खनन्तो नृपशार्दूल सर्वतः परिचक्रमुः॥
evam parvata saṃbādham jambū dvīpam nṛpātmajāḥ |khananto nṛpaśārdūla sarvataḥ paricakramuḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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