वाल्मीकि रामायण 1.43.33
जगाम सरिताम् श्रेष्ठा सर्व पाप प्रणाशिनी ।ततो हि यजमानस्य जह्नोः अद्भुत कर्मणः॥
jagāma saritām śreṣṭhā sarva pāpa praṇāśinī |tato hi yajamānasya jahnoḥ adbhuta karmaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें