वाल्मीकि रामायण 1.48.28
मम रूपम् समास्थाय कृतवान् असि दुर्मते ।अकर्तव्यम् इदम् यस्मात् विफलः त्वम् भविष्यति॥
mama rūpam samāsthāya kṛtavān asi durmate |akartavyam idam yasmāt viphalaḥ tvam bhaviṣyati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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