वाल्मीकि रामायण 1.52.3
उपविष्टाय च तदा विश्वामित्राय धीमते ।यथा न्यायम् मुनि वरः फल मूलम् उपाहरत्॥
upaviṣṭāya ca tadā viśvāmitrāya dhīmate |yathā nyāyam muni varaḥ phala mūlam upāharat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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