वाल्मीकि रामायण 1.63.3
तम् एवम् उक्त्वा देवेशः त्रिदिवम् पुनः अभ्यगात् ।विश्वामित्रो महातेजा भूयः तेपे महत् तपः॥
tam evam uktvā deveśaḥ tridivam punaḥ abhyagāt |viśvāmitro mahātejā bhūyaḥ tepe mahat tapaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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