वाल्मीकि रामायण 1.63.7
अनुगृह्णीष्व भद्रम् ते मदनेन सु मोहितम् ।इति उक्ता सा वरारोहा तत्र वासम् अथ अकरोत्॥
anugṛhṇīṣva bhadram te madanena su mohitam |iti uktā sā varārohā tatra vāsam atha akarot ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें