वाल्मीकि रामायण 1.63.8
तपसो हि महाविघ्नो विश्वामित्रम् उपागतम् ।तस्याम् वसन्त्याम् वर्षाणि पंच पंच च राघव॥
tapaso hi mahāvighno viśvāmitram upāgatam |tasyām vasantyām varṣāṇi paṃca paṃca ca rāghava ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें