वाल्मीकि रामायण 1.64.3
अयम् सुर पते घोरो विश्वामित्रो महामुनिः ।क्रोधम् उत्स्रच्यते घोरम् मयि देव न संशयः॥
ayam sura pate ghoro viśvāmitro mahāmuniḥ |krodham utsracyate ghoram mayi deva na saṃśayaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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