वाल्मीकि रामायण 1.74.10
तान् दृष्ट्वा राज शार्दूलो वसिष्ठम् पर्यपृच्छत ।असौम्याः पक्षिणो घोरा मृगाः च अपि प्रदक्षिणाः॥
tān dṛṣṭvā rāja śārdūlo vasiṣṭham paryapṛcchata |asaumyāḥ pakṣiṇo ghorā mṛgāḥ ca api pradakṣiṇāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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