वाल्मीकि रामायण 1.74.11
किम् इदम् हृदय उत्कम्पि मनो मम विषीदति ।राज्ञो दशरथस्य एतत् श्रुत्वा वाक्यम् महान् ऋषिः॥
kim idam hṛdaya utkampi mano mama viṣīdati |rājño daśarathasya etat śrutvā vākyam mahān ṛṣiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें