वाल्मीकि रामायण 1.74.2
विश्वामित्रो गते राजा वैदेहम् मिथिला अधिपम् ।आपृष्ट्व इव जगाम आशु राजा दशरथः पुरीम्॥
viśvāmitro gate rājā vaideham mithilā adhipam |āpṛṣṭva iva jagāma āśu rājā daśarathaḥ purīm ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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