वाल्मीकि रामायण 1.76.14
सो अहम् गुरु वचः कुर्वन् पृथिव्याम् न वसे निशाम् ।तदा प्रभृति काकुत्स्थ कृता मे काश्यपस्य ह॥
so aham guru vacaḥ kurvan pṛthivyām na vase niśām |tadā prabhṛti kākutstha kṛtā me kāśyapasya ha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें