वाल्मीकि रामायण 2.100.52
कच्चिद्दर्शयसे नित्यं मनुष्याणां विभूषितम् ।उत्थायोत्थाय पूर्वाह्णे राजपुत्र महापथे॥
kacciddarśayase nityaṃ manuṣyāṇāṃ vibhūṣitam |utthāyotthāya pūrvāhṇe rājaputra mahāpathe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें