वाल्मीकि रामायण 2.102.14
एवमुक्त्वा स भरतं भार्यामभ्येत्य राघव: ।उवाच शोकसन्तप्त: पूर्णचन्द्रनिभाननाम्॥
evamuktvā sa bharataṃ bhāryāmabhyetya rāghava: |uvāca śokasantapta: pūrṇacandranibhānanām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें