वाल्मीकि रामायण 2.104.4
इत्युक्त: कैकयीपुत्र: काकुत्स्थेन महात्मना ।प्रगृह्य बलवद्भूय: प्राञ्जलिर्वाक्यमब्रवीत्॥
ityukta: kaikayīputra: kākutsthena mahātmanā |pragṛhya balavadbhūya: prāñjalirvākyamabravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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