वाल्मीकि रामायण 2.106.2
को हि स्यादीदृशो लोके यादृशस्त्वमरिन्दम ।न त्वां प्रव्यथयेद्दु:खं प्रीतिर्वा न प्रहर्षयेत्॥
ko hi syādīdṛśo loke yādṛśastvamarindama |na tvāṃ pravyathayeddu:khaṃ prītirvā na praharṣayet ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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