Loading
वाल्मीकि रामायण 2.106.3
सम्मतश्चासि वृद्धानां तांश्च पृच्छसि संशयान्॥
sammataścāsi vṛddhānāṃ tāṃśca pṛcchasi saṃśayān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंसम्मतश्चासि वृद्धानां तांश्च पृच्छसि संशयान्॥
sammataścāsi vṛddhānāṃ tāṃśca pṛcchasi saṃśayān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें