वाल्मीकि रामायण 2.106.4
यथा मृतस्तथा जीवन् यथा ऽसति तथा सति ।यस्यैष बुद्धिलाभ: स्यात्परितप्येत केन स:॥
yathā mṛtastathā jīvan yathā 'sati tathā sati |yasyaiṣa buddhilābha: syātparitapyeta kena sa: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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